जन्नत में बैठकर
दुनिया चलाने वाले से
जब कभी
एक सवाल पूछा जाएगा
भागता फिरेगा
तरबतर पसीने से
मगर जवाब दे न पाएगा
सवाल कोई इतना टेढ़ा भी नहीं
सीधा है,सपाट है
फकत इतना जानना है
मुझे उससे,
हां दुनिया बनाने वाले से
कि महंगाई के दौर में
और आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी
इस धरा पर क्या
अपना सिंहासन छोड़कर आएगा
और आम आदमी की तरह
एक दिन
हां,फकत एक दिन
इस लोक में
जीवन बसर कर पाएगा।
कुंवर प्रीतम
1 comments:
ek din chala paata to vo insaan jaisa mahaan kehlaane ka hakdaar hota........ye sawaal sirf sawaal hai jawaab dene waala khaamosh hai kunwar jee.
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