खुदगर्जों की इस दुनिया में अपनी क्या औकात भला
बेईमान सब गुंबद पर हैं, नींव की क्या औकात भला
भाई-बन्धु, रिश्ते-नाते, ईश्वर तक है लेन-देन में
कुंवर फकीरा देख रहा पर, उसकी क्या औकात भला
कुंवर प्रीतम

1 comments:

rashmi said...

neev ke bina gumbad ka koi vajood nahi hota,kab dhah jaaye............isliye neev ki majbooti aavashyak .