हार चुके जो निज जीवन से,उनमें जोश जगाए
भेदभाव सब ऊंच-नीच के सारे आज भगाए
दूर करे अंधियार जगत के, आलोकित हों सारे
काश कुंवर से आज शारदे ऐसा काव्य रचाए
कुंवर प्रीतम
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