क्यां पर इतरावै रै छोरा,क्यां पर चोंच लड़ावै
आखै दिन रामाण मचावै, सैंका बटका खावै
........रै भाया क्यां पर चोंच लड़ावै
गुरजी तन्नै घणी केयी,पर बात समझ नीं आयी
मां-बापां री एक सुणी ना,झूटी राड़ मचायी
बाप बापड़ो भोळो मिनख,तूं जान धिंगाणै खावै
.........रै भाया क्यां पर चोंच लड़ावै
ऊंचा-ऊंचा सुपणा थारा,ब्यां में कठै सचाई
समझ गया सै बातां थारी,तन्नै मिलै नहीं लुगाई
ब्याव करावण खातर,झुठो मुण्डो पड्यो सुजावै
........रै भाया क्यां पर चोंच लड़ावै
कह्वै कुंवर धरती पर रैणो,ब्यां में रेवै भलाई
तूं के जाणै पीर बावळा,फटी नै पैर बिवाई
थांरा साथी ऊंचा चढग्या,नाम-र दाम कमावै
आखै दिन रामाण मचावै,तूं क्यां पर चोंच लड़ावै...
कुंवर प्रीतम
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