क्यों फकत उलझा रहे हो खुद ही अपने रास्ते
घूंट गम के पी रहे हो, क्यों किसी के वास्ते
प्रेम की मंजिल जिन्हें समझ रहे थे,तुंम कुंवर
कहां गए वो,कल तलक थे एक जिनके रास्ते
-कुंवर प्रीतम

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