हम भी उनको खत लिखेंगे,पहले खत उनका तो आए


हम भी उनको खत लिखेंगे,पहले खत उनका तो आए
तन्हाई में दिन औ रातें कैसे गुजरीं वे भी बताएं
अपना हाल वही है,जैसा छोड़ गए थे सालों पहले
भींगे तकिए सुबक रहे हैं और आगे क्या हाल सुनाएं

दिन का सूरज,चांद रात का,मेरी कहानी खुद लिखता है
मेरी याद बिना पल उनके, बीते कैसे कुछ तो सुनाएं
व्यथित हृदय लेकर बस्ती में पतझड़-पतझड़ आज कुंवर
वे भी तो कुछ अपनी बस्ती के बासन्ती हाल सुनाएं

यारो,हम भी जान रहे हैं,नहीं कौई पैगाम लिखेगा
चलो कुंवर हम उनके बहाने,बातें कुछ खुद से कर आएं

-कुंवर प्रीतम


क्यों फकत उलझा रहे हो खुद ही अपने रास्ते
घूंट गम के पी रहे हो, क्यों किसी के वास्ते
प्रेम की मंजिल जिन्हें समझ रहे थे,तुंम कुंवर
कहां गए वो,कल तलक थे एक जिनके रास्ते
-कुंवर प्रीतम