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  • ▼  2012 (16)
    • ►  April (9)
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      • हों मतभेद विचारों में, मनभेद कभी मत करना जी बोली ...
      • मुक्तक चलो फिर गांव की जानिब,शहर अच्छा नहीं लगता ...
      • आओ प्यारे एक सिखाएँ तुमको असली मंतर प्यार कभी मत ...
      • कुंवर प्रीतम के नए मुक्तक 21 अप्रैल 2012 हां मैन...
      • मत फरेबी अफसानों में हमें उलझाइए कीजिए एहसान यार ...
      • तुम भी यहीं कहीं हो, हम भी यहीं कहीं हैं दिखते नह...
      • कुंवर प्रीतम के नए मुक्तक
    • ►  March (5)
      • हों मतभेद विचारों में, मनभेद कभी मत करना जीबोली मे...
      • धरती से अम्बर तक सारी खुशियां तुम्हें मिलें लेकिन...
      • हौसला जिसने दिया शाम-ओ-सहर अब वही ढा रहा दिल पर क...
      • अरे बावरे मन आंगन में क्योंकर प्रीत जगाता है प्रे...
      • दफ्तर
    • ▼  February (2)
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  • ►  2011 (130)
    • ►  December (2)
      • हम भी उनको खत लिखेंगे,पहले खत उनका तो आए
      • क्यों फकत उलझा रहे हो खुद ही अपने रास्ते घूंट गम ...
    • ►  November (16)
      • मन्नै के लेणो
      • जीवन व्यर्थ गंवाई मत
      • बिनां बुलायां गयां सासरै,समझो नाक कटाणी
      • कई दिनां स्यूं देख रैयो हूं,शैरां रा म्है दांव रे...
      • मिलणो-भिटणो भूल गयो रै भाई,बदल्या सै संस्कार आपणल...
      • क्यां पर इतरावै रै छोरा,क्यां पर चोंच लड़ावै
      • जरा सोचो अगर संसार में सब नेक हो जाएं मिटाकर दूरि...
      • संस्कार आपणा आडै हरदम आपणला ही आवै
      • मैं छापै में हूं काम करूं
      • मुद्दत हो गयी,बैठो यारो,कुछ तो दिल की बात करें इस...
      • 1 रै चाल जीवड़ा,उठा फावड़ो,खेतां खानी कर मूंडो बो...
      • लो आज प्रशस्ति पढ़ देता हूं,तेरे मन की कह देता हूं...
      • आ प्रशस्ति थारी बांचूं हूं,थारै मन की काडू हूं
      • केंद्र पर दबाव की सियासत कर रहीं ममता
      • कठिन है राह जीवन की,बड़ा दुश्वार है चलना कभी लगता ...
      • मंदिर-वंदिर,मन्नत-वन्नत सब बेमतलब बेमानी रे दर-दर...
    • ►  October (10)
      • प्रणाम तुम्हें करता हूं मां,जन्म दिया,इंसान बनाया...
      • व्यस्तताएं दोस्ती में बीज कैसे बो गयीं चाहतें मिल...
      • हार चुके जो निज जीवन से,उनमें जोश जगाए भेदभाव सब ...
      • दीवाली दस फीसद की,नब्बे फीसद रोता है
      • पैसा सबका बाप
      • है अगर रिश्ता हमारा सूर्य के परिवार से दो कदम आगे...
      • जागता है रात को अब कौन किसके वास्ते मंजिलें सब की...
      • सोच रहा हूं,दुनिया की है कैसी कैसी रीत गजब बेखुद ...
      • हिम्मत से मत हार रे पगले,रोना-गाना छोड़ खुद के दम...
      • खुदगर्जों की इस दुनिया में अपनी क्या औकात भला बेई...
    • ►  September (19)
      • हाय,शहर का जीवन कैसा दुर्गम और दुश्वार हुआ कदम कद...
      • दुनिया बनाने वाले से सिर्फ एक सवाल
      • हमको तो लगता नहीं,तुमको लगे तो लगे हमको ठग सकते न...
      • मूड खराब है यार,कहो मत कुछ भी मुझसे आज रहने दो खा...
      • मुक्तक चलो फिर गांव की जानिब,शहर अच्छा नहीं लगता ...
      • रूकावट और बाधाएं हमें कब तोड़ पायी हैं निराशा की ...
    • ►  August (38)
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